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Sunday, 30 August 2015

शीघ्र पतन कोई बिमारी नही है


शीघ्र पतन का मतलब है कि सेक्स के समय स्त्री के झड़ने से कहीं पहले झड़ जाना.
इस स्थिति में क्योंकि स्त्री को ओर्गास्म नहीं होता है इसलिए उसकी सेक्स की
चाहत अधूरी रह जाती है
और सेक्स की अधूरी चाहत से चिडचिडापन बना रहता है, किसी काम में मन नहीं लगता
और इस स्थिति में यदि किसी अन्य पुरुष उसकी और हाथ बढाये तो दूसरे पुरुष से
शारीरिक सम्बन्ध बन जाना स्वाभाविक है.

वैसे देखा जाय तो यह एक मानसिक रूप से ठीक हो जाने वाली बीमारी है
नीम हकीम से अपना इलाज करवाना मतलब अपना धन और स्वस्थ्य से खिलवाड़ करना होता
है.

टेंशन से दूर रहिये, यदि तम्बाकू और धूम्रपान का सेवन करते हो तो बंद कर
दीजिये
खाने पीने में भिगोई हुई दालें, पनीर, दूध, हरी सब्जिया, सलाद आदि की मात्र
बढा दीजिये
यदि हस्तमैथुन या सेक्स प्रतिदिन या एक दिन में अधिक बार करते हो तो ५ से ७
दिन में एक बार कर दीजिये. इस से यदि पहली बार जल्दी हो भी गया तो दूसरी बार
का टाइम बढ़ जाएगा.

जल्दी उत्तेजित मत होइए, एवं जब लिंग खडा हो जाये तो उसको अंडरवेअर में ऊपर
की ओर कर लीजिये,
देसी घी/नारियल का तेल/फेस क्रीम में से किसी की मालिश लिंग पर हलके हाथों से
कीजिये और हाथ का मूवमेंट लिंग के जड़ से सुपाडे की ओर होना चाहिए.

अपने मन को सुदृढ़ कीजिये, ओर विचार कीजिये कि आपको अभी नहीं हो रहा है. कुछ
देर ओर लगेगी......

सुपाडे को सूखा मत रहने दीजिये, इस पर ऊपर लिखे चिकनाई में से कोई सी लगाकर
चिकनाई बना कर रखिये.

देखिये कि आप खुद के साथ क्या कमाल कर पाते हैं?
दिन भर में १५ से २० गिलास पानी पीजिये, और कब्ज मत रहने दीजिये

जल्दी उत्तेजित मत होइए, एवं जब लिंग खडा हो जाये तो उसको अंडरवेअर में ऊपर
की ओर कर लीजिये,
अपने मन को दूसरी और मोड़ लीजिये ताकि उत्तेजना का असर कम हो जाए
एक बार लिंग के खडा होने के बाद कुछ देर को सेक्स क्रिया से दूर हो जाइए, इस
तरह से जब लिंग बैठ कर फिर खडा होगा तो स्खलन का समय बढ़ जायेगा.
शीघ्रपतन की हकीकत

सेक्स क्रिया में मानवों के बीच शीघ्रपतन नामक शब्द काफी अहमियत रखता है. यदि
इस शब्द की शाब्दिक व्याख्या करें तो शीघ्र गिर जाने को शीघ्रपतन कहते हैं।
लेकिन सेक्स के मामले में यह शब्द वीर्य के स्खलन के लिए, प्रयोग किया जाता
है। पुरुष की इच्छा के विरुद्ध उसका वीर्य अचानक स्खलित हो जाए, स्त्री सहवास
करते हुए संभोग शुरू करते ही वीर्यपात हो जाए और पुरुष रोकना चाहकर भी
वीर्यपात होना रोक न सके, अधबीच में अचानक ही स्त्री को संतुष्टि व तृप्ति
प्राप्त होने से पहले ही पुरुष का वीर्य स्खलित हो जाना या निकल जाना, इसे
शीघ्रपतन होना कहते हैं। इस व्याधि का संबंध स्त्री से नहीं होता (क्योंकि
स्त्रियों में स्खलन की क्रिया नहीं पायी जाती), यह पुरुष से ही होता है और
यह व्याधि सिर्फ पुरुष को ही होती है। शीघ्र पतन की सबसे खराब स्थिति यह होती
है कि सम्भोग क्रिया शुरू होते ही या होने से पहले ही वीर्यपात हो जाता है।
सम्भोग की समयावधि कितनी होनी चाहिए यानी कितनी देर तक वीर्यपात नहीं होना
चाहिए, इसका कोई निश्चित मापदण्ड नहीं है। यह प्रत्येक व्यक्ति की मानसिक एवं
शारीरिक स्थिति पर निर्भर होता है। वीर्यपात की अवधि स्तम्भनशक्ति पर निर्भर
होती है और स्तम्भन शक्ति वीर्य के गाढ़ेपन और यौनांग की शक्ति पर निर्भर
होती है। स्तम्भन शक्ति का अभाव होना शीघ्रपतन है। बार-बार कामाग्नि की आंच
(उष्णता) के प्रभाव से वीर्य पतला पड़ जाता है सो जल्दी निकल पड़ता है। ऐसी
स्थिति में कामोत्तेजना का दबाव यौनांग सहन नहीं कर पाता और उत्तेजित होते ही
वीर्यपात कर देता है। यह तो हुआ शारीरिक कारण, अब दूसरा कारण मानसिक होता है
जो शीघ्रपतन की सबसे बड़ी वजह पाई गई है। एक और लेकिन कमजोर वजह और है वह है
हस्तमैथुन. हस्तमैथुन करने वाला जल्दी से जल्दी वीर्यपात करके कामोत्तेजना को
शान्त कर हलका होना चाहता है और यह शान्ति पा कर ही वह हलकेपन तथा क्षणिक
आनन्द का अनुभव करता है। इसके अलावा अनियमित सम्भोग, अप्राकृतिक तरीके से
वीर्यनाश व अनियमित खान-पान आदि।


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